पुणे के शनिवार वाड़ा से रात को किसकी चीखें आती हैं? 🏰

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"काका माला वाचवा!" (काका मुझे बचाओ!)

यह महल कभी मराठा साम्राज्य की शान था। बाजीराव पेशवा ने इसे बड़े प्यार से बनवाया था। लेकिन यहाँ की दीवारों ने सिर्फ़ धोखे देखे।

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कहानी है 18 साल के नारायण राव की, जो बहुत कम उम्र में पेशवा बन गए थे। लेकिन उनके अपने ही चाचा (रघुनाथ राव) को यह मंज़ूर नहीं था।

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उनकी चाची 'आनंदीबाई' ने एक भयानक साज़िश रची। उन्होंने शिकारियों को भेजे गए खत में "पकड़ो" शब्द को बदल कर "मारो" कर दिया।

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अमावस की रात हत्यारे महल में घुस आए। नन्हा पेशवा अपनी जान बचाने के लिए चाचा के कमरे की तरफ भागा।

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वो चिल्लाते रहे— "काका माला वाचवा" (चाचा मुझे बचाओ), लेकिन चाचा ने दरवाजा नहीं खोला। उनके टुकड़े कर दिए गए।

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कहते हैं, आज भी पूर्णिमा की रात को उस राजकुमार की आत्मा वही दर्दनाक चीखें लगाती है— "काका मुझे बचाओ!"

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क्या सच में शनिवार वाड़ा शापित है? यहाँ हुई 3 रहस्यमयी मौतों की कहानी पढ़ें।

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