शहर के कॉफ़ी शॉप में एक हल्की बारिश हो रही थी। अनीश अपने नोट्स में खोया हुआ बैठा था, तभी उसकी नजर टेबल के दूसरी ओर बैठे आईशा पर पड़ी।
आईशा की मुस्कान में कुछ ऐसा जादू था कि अनीश का दिल अचानक धड़कने लगा। वह धीरे-धीरे अपनी कॉफ़ी की चुस्की लेते हुए उसे देखता रहा।
कुछ देर बाद, आईशा की नजर भी अनीश पर पड़ी। उसने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया। अनीश की धड़कन और तेज हो गई। वह हिचकिचाते हुए उसके पास गया और बोला,
“हैलो, क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ?”
आईशा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“हाँ, क्यों नहीं।”
इस छोटी सी मुलाकात ने उनके दिलों में एक अजीब सी गर्माहट पैदा कर दी।
दोस्ती की शुरुआत
अगले कुछ हफ्तों में दोनों की मुलाकातें कॉफ़ी शॉप में नियमित होने लगी। पढ़ाई के बहाने, किताबों और नोट्स की बातें करते-करते उन्होंने एक-दूसरे के बारे में जानना शुरू किया।
अनीश को आईशा का हंसना बहुत पसंद था, और आईशा को अनीश की गंभीर सोच और उसका शांत स्वभाव आकर्षित करता था। दोनों धीरे-धीरे अच्छे दोस्त बन गए, पर दिल की बात किसी ने किसी से कहने की हिम्मत नहीं जुटाई।
पहली झिझक
एक दिन कॉलेज की लाइब्रेरी में अनीश ने आईशा से कहा,
“तुम्हें पता है, जब तुम मुस्कुराती हो, मुझे अपनी दुनिया पूरी लगती है।”
आईशा ने हँसते हुए कहा,
“इतना ड्रामेटिक मत बनो, अनीश।”
लेकिन दोनों जानते थे कि यह कोई साधारण हँसी-मज़ाक नहीं था। दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं, और आँखों में एक अनकहा इश्क़ उभर आया था।
पहला इशारा
बारिश की एक शाम, कॉलेज के गार्डन में दोनों बैठे थे। अनीश ने अपनी जेब से छोटी सी चॉकलेट निकाली और आईशा को दी।
“ये तुम्हारे लिए,” उसने धीरे से कहा।
आईशा ने चॉकलेट लेते हुए कहा,
“धन्यवाद… लेकिन यह क्या मतलब है?”
अनीश ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा,
“क्योंकि… मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना अच्छा लगता है।”
आईशा की आँखों में चमक थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“मैं भी ऐसा ही महसूस करती हूँ।”
इस छोटे से पल ने उनके दिलों में प्यार की शुरुआत कर दी।
पहली डेट
कुछ हफ्तों बाद अनीश ने आईशा को मूवी के लिए बुलाया। वह थोड़ा नर्वस था, क्योंकि यह पहली डेट थी।
फिल्म खत्म होने के बाद, उन्होंने हाथ में हाथ डालकर कॉफ़ी पी। हवा ठंडी थी, पर उनके दिलों में एक गर्मी थी जो बारिश से भी तेज थी।
आईशा ने धीरे से कहा,
“मुझे लगता है कि हम एक-दूसरे के लिए बने हैं।”
अनीश ने मुस्कुराते हुए कहा,
“मुझे भी ऐसा ही लगता है।”
उस दिन से दोनों ने अपने प्यार को openly स्वीकार किया।
पहली नोक-झोंक और समझौता
प्यार में हमेशा मिठास नहीं होती। एक दिन अनीश ने आईशा के साथ थोड़ा झगड़ा किया।
आईशा ने नाराज़ होकर कहा,
“तुम हमेशा मेरी बात नहीं सुनते!”
अनीश ने धीरे से कहा,
“माफ़ करना, मैं बस तुम्हें खुश देखना चाहता था।”
कुछ मिनटों की चुप्पी के बाद, आईशा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“ठीक है, लेकिन अगली बार सुनना ज़रूरी है।”
इस छोटे से झगड़े ने उन्हें समझाया कि प्यार में धैर्य और समझौता बहुत ज़रूरी है।
प्यार की गहराई
समय बीतता गया, और दोनों का रिश्ता और गहरा होता गया। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद भी उन्होंने अपने प्यार को बनाए रखा।
अनीश ने आईशा के लिए एक कविता लिखी:
“तेरी मुस्कान में खो जाऊँ मैं,
तेरी बातें सुनकर जी लूँ मैं।
हर पल तेरे साथ बिताऊँ मैं,
बस यही ख्वाब है मेरा।”
आईशा ने आँखों में आँसू भरकर कहा,
“मैं भी तुम्हारे बिना अपनी दुनिया नहीं सोच सकती।”
खुशियों का अंत नहीं
अनीश और आईशा ने अपने प्यार को समय, दूरी और परेशानियों के बावजूद बनाए रखा। उन्होंने सीखा कि सच्चा प्यार सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि समझ, धैर्य और भरोसे से भी बढ़ता है।
और उस छोटे से कॉफ़ी शॉप के टेबल पर शुरू हुई मुलाकात, एक जिंदगी भर के प्यार में बदल गई।


