जंगल का राजा कौन? एक प्रेरणादायक कहानी जो सिखाती है—सच्चा नेता ताकत से नहीं, सेवा से बनता है।
कहानी की शुरुआत: जंगल में मचा हंगामा
एक शांत सुबह, जब सूरज की किरणें पत्तों के बीच से झर-झर गिर रही थीं, पूरे जंगल में एक अफ़वाह फैल गई:
“शेर बादल सिंह अब बूढ़ा हो गया है… अब जंगल को नया राजा चाहिए!”
यह बात सुनकर जंगल में हलचल मच गई। बंदर से लेकर भालू तक, हिरण से लेकर लोमड़ी तक—सब सोचने लगे कि अब क्या होगा।
इसलिए जंगल के बीच विशाल बरगद के पेड़ के नीचे एक बड़ी सभा बुलाई गई, जहाँ फैसला होना था—
जंगल का असली राजा कौन बनेगा?
हाथी का दावा: “ताकत ही राज है!”
सबसे पहले आगे आया हाथी महाबली।
उसने गर्व से कहा:
“मैं सबसे बड़ा और ताकतवर हूँ। रास्ता खुद ही बन जाता है। इसलिए राजा बनने का हक मेरा है!”
जानवर सोच में पड़ गए—
ताकत अच्छी है…
लेकिन क्या सिर्फ ताकत से जंगल चलता है?
चीते का तर्क: “राजा वही जो सबसे तेज़ हो!”
अगला नंबर था चीते छलांगू का।
वह बिजली-सी तेजी से आया और बोला:
“मैं सबसे तेज़ दौड़ता हूँ! कोई मुसीबत आए तो मैं सबसे पहले पहुँचूँगा।”
तभी बंदर चुटकी काटते बोला:
“पर अगर तुम हर बात पर दौड़ जाओगे तो सोचने का समय कब मिलेगा?”
सभा हँसी से भर गई।
लोमड़ी का कहना: “दिमाग बिना राज नहीं!”
लोमड़ी चंचला आगे आई और बोली:
“राजा को समझदार होना चाहिए। मैं चालें समझती हूँ, समस्याएँ हल करती हूँ।”
एक छोटे खरगोश ने धीरे से कहा:
“पर क्या राजा को ईमानदार और दयालु भी नहीं होना चाहिए?”
लोमड़ी चुप हो गई।
बंदर की बात: “हँसी भी जरूरी है!”
बंदर फुनटुन उछलता-कूदता बोला:
“जंगल को खुश रखने वाला राजा चाहिए! और वो काम मैं कर सकता हूँ।”
एक चिड़िया बोली:
“राज सिर्फ मज़ाक से नहीं चलता।”
बंदर चुपचाप बैठ गया।
ऊहापोह: अब कैसे होगा फैसला?
जंगल में खामोशी छा गई।
सबके पास कुछ न कुछ गुण थे—
पर कोई भी पूरी तरह राजा जैसा नहीं लगा।
और तभी…
खरगोश कुशु — सबसे छोटा, लेकिन सबसे समझदार
छोटा-सा खरगोश कुशु धीरे से आगे आया।
वह न बड़ा था,
न तेज़,
न शक्तिशाली।
लेकिन उसकी आवाज़ में सच्चाई थी।
वह बोला:
**“राजा वो है जो सबकी सुने,
सबकी मदद करे,
और घमंड कभी दिल में न आने दे।
ताकत, चालाकी, तेज़ी—सब जरूरी हैं,
लेकिन सबसे जरूरी हैं
सेवा, सच्चाई और मिलजुलकर चलना।”**
पूरे जंगल में सन्नाटा…
और फिर तालियाँ गूंज उठीं।
“खरगोश छोटा है… पर इसका दिल सबसे बड़ा है!”
जंगल की नई व्यवस्था: एक राजा नहीं, एक परिषद्
कुशु के सुझाव पर सबने फैसला किया:
अब जंगल में एक राजा नहीं,
बल्कि एक परिषद् होगी जिसमें हर जानवर अपनी ताकत से योगदान देगा—
- 🐘 हाथी — जंगल की रक्षा
- 🐆 चीता — संदेश पहुँचाना
- 🦊 लोमड़ी — समझदारी और सलाह
- 🐒 बंदर — खुशी और उत्साह फैलाना
- 🐇 खरगोश — निर्णय लेना और सबकी सुनना
अब जंगल सच में खुशहाल हो गया।
सीख/Moral
“नेतृत्व ताकत से नहीं, सेवा, विनम्रता और सबकी सुनने से आता है।” टीमवर्क हमेशा अकेले के राज से बड़ा होता है।
अगर आप इस जंगल में होते— आप क्या बनना पसंद करते? ताकतवर? तेज़? चालाक? या दयालु?


