एक हरे-भरे जंगल के किनारे एक छोटी सी मेहनती चींटी रहती थी, जिसका नाम था चिंकी। चिंकी बहुत ही अनुशासित और समझदार थी। जब बाकी कीड़े-मकोड़े खेलते या आराम करते थे, तब चिंकी हमेशा अपने काम में लगी रहती थी। वह रोज सुबह जल्दी उठती, दूर-दूर तक जाकर खाने के छोटे-छोटे दाने इकट्ठा करती और उन्हें अपने बिल में सुरक्षित रखती। कई बार दूसरे जानवर उसका मज़ाक उड़ाते और कहते, “इतनी मेहनत क्यों करती हो? अभी तो मौसम अच्छा है, आराम करो!” लेकिन चिंकी बस मुस्कुरा देती और अपना काम जारी रखती।
उसी जंगल में एक टिड्डा भी रहता था, जिसका नाम था टिंकू। टिंकू बिल्कुल चिंकी के उलट था—वह दिन भर गाना गाता, कूदता-फांदता और मस्ती करता रहता। उसे भविष्य की कोई चिंता नहीं थी। जब भी चिंकी उसे मेहनत करते देखती, तो प्यार से समझाती, “टिंकू, थोड़ा समय काम के लिए भी निकालो। जब सर्दी आएगी, तब खाना ढूंढना मुश्किल हो जाएगा।” लेकिन टिंकू हंसकर कहता, “अरे अभी तो बहुत समय है, बाद में देखेंगे!”
धीरे-धीरे मौसम बदलने लगा। ठंडी हवाएं चलने लगीं और कुछ ही दिनों में कड़क सर्दी आ गई। जंगल में हर जगह ठंड और सन्नाटा छा गया। अब बाहर निकलना मुश्किल हो गया था और खाने की चीजें भी कम हो गई थीं। चिंकी अपने बिल में आराम से थी, क्योंकि उसने पहले ही काफी खाना जमा कर लिया था। वह रोज थोड़ा-थोड़ा खाती और आराम से रहती।
दूसरी ओर, टिंकू बहुत परेशान हो गया। उसे ठंड से बचने की जगह नहीं मिल रही थी और खाने के लिए कुछ भी नहीं था। भूख और ठंड से कांपते हुए वह आखिरकार चिंकी के बिल के पास पहुंचा और धीरे से बोला, “चिंकी, मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी। क्या तुम मेरी मदद कर सकती हो?” चिंकी ने दरवाजा खोला और टिंकू की हालत देखकर उसे अंदर बुला लिया। उसने उसे खाना दिया और गर्म जगह पर बैठाया।
चिंकी ने मुस्कुराकर कहा, “देखो टिंकू, मेहनत और तैयारी हमेशा काम आती है। अगर हम समय रहते काम करें, तो मुश्किल समय में परेशानी नहीं होती।” टिंकू को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने वादा किया कि अब वह भी मेहनत करेगा और भविष्य के बारे में सोचेगा। उस दिन के बाद टिंकू ने अपनी आदत बदल ली और चिंकी की तरह मेहनती बन गया।
सीख/Moral
समय पर की गई मेहनत ही हमें मुश्किल समय में बचाती है।, आलस करने से बाद में पछताना पड़ता है।


