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लालच का अंत | Hindi Folk Tale Story

Posted on January 20, 2026 by My Hindi Stories

Hindi folk tale of snake and farmer showing Nag Devta emerging from anthill with gold coin, moral story about trust and greed

सांप और किसान की वह लोककथा जो जीवन का सच बताती है

क्या आप जानते हैं कि हमारे बुजुर्ग कहानियों के माध्यम से हमें जीवन का सबसे कड़वा सच समझा जाते थे? आज हम आपके लिए एक ऐसी ही पुरानी Hindi Folk Tale Story लेकर आए हैं। यह कहानी है “विश्वास और लालच” की।

अक्सर हम जल्दी अमीर बनने की चाह में वह भी खो देते हैं जो हमारे पास पहले से होता है। यह कहानी (Moral Story in Hindi) आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।

सोने का सिक्का और नाग देवता

एक समय की बात है, किसी गांव में हरिदत्त नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह एक साधारण किसान था जो अपने खेतों में कड़ी मेहनत करता था, लेकिन उसे अपनी मेहनत का फल नहीं मिल पा रहा था।

एक दिन वह अपने खेत में पेड़ की छांव में सुस्ता रहा था, तभी उसने देखा कि पास ही एक बांबी (Anthill) से एक बड़ा सा फनधारी सांप बाहर निकला।

हरिदत्त ने सोचा, “शायद यह इस खेत के देवता हैं, मैंने कभी इनकी पूजा नहीं की, इसलिए शायद मेरी खेती अच्छी नहीं होती।”

उसने तुरंत एक कटोरे में दूध लिया और बांबी के पास रख दिया और हाथ जोड़कर कहा, “हे नाग देवता! मुझे माफ़ करना, मुझे आपके बारे में पता नहीं था।”

अगले दिन जब वह खेत पर आया, तो वह हैरान रह गया! दूध के खाली कटोरे में एक चमकता हुआ सोने का सिक्का (Gold Coin) रखा था।

किसान के बेटे का लालच 

अब यह रोज का नियम बन गया। हरिदत्त रोज शाम को दूध रखता और अगली सुबह उसे एक सोने का सिक्का मिलता। किसान अब अमीर होने लगा था।

एक बार हरिदत्त को किसी काम से दूसरे गांव जाना पड़ा। उसने अपने बेटे को बुलाकर कहा, “बेटा, खेत में बांबी के पास रोज दूध रख आना, लेकिन ध्यान रहे, उसे छेड़ना मत।”

बेटा बांबी के पास गया और दूध रख आया। अगले दिन उसे भी सोने का सिक्का मिला।

सिक्का हाथ में आते ही बेटे के मन में लालच (Greed) आ गया। उसने सोचा:

जरूर इस बांबी के अंदर खजाना छिपा है। यह सांप रोज एक-एक सिक्का देता है। अगर मैं इस सांप को मार दूं, तो सारा सोना एक साथ मेरा हो जाएगा!

विश्वासघात का परिणाम

अगले दिन किसान का बेटा हाथ में एक भारी लाठी लेकर खेत पर गया। जैसे ही सांप दूध पीने के लिए बाहर निकला, बेटे ने पूरी ताकत से लाठी सांप के ऊपर दे मारी।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सांप फुर्ती से बच गया और गुस्से में आकर उसने बेटे को डस लिया। सांप का जहर इतना तेज था कि थोड़ी ही देर में बेटे की मृत्यु हो गई।

जब गांव वालों ने और हरिदत्त ने यह सुना, तो वे दौड़े-दौड़े आए। हरिदत्त अपने बेटे के शव को देखकर रोने लगा, लेकिन वह समझ गया कि यह उसके बेटे के लालच का फल है।

क्या टूटा हुआ विश्वास जुड़ सकता है?

कुछ दिनों बाद, हरिदत्त फिर से दूध लेकर बांबी के पास गया। वह चाहता था कि पुरानी दोस्ती फिर से शुरू हो जाए और उसे सोने के सिक्के मिलते रहें। उसने दूर से ही जोर-जोर से नाग देवता की स्तुति की।

सांप बाहर आया, लेकिन इस बार उसने दूध नहीं पिया। उसने बांबी के अंदर से ही कहा:

हरिदत्त! तुम यहां सोने के लालच में आए हो। तुम अपने बेटे की चिता की आग भूल गए, और मैं अपनी लाठी की चोट नहीं भूला हूं। जहां ‘अविश्वास’ और ‘चोट’ हो, वहां प्रेम नहीं रह सकता। अब चले जाओ और कभी वापस मत आना।

यह कहकर सांप अंदर चला गया और फिर कभी बाहर नहीं निकला।

कहानी से सीख (Moral of the Story)

अति लोभ विनाश का कारण है: किसान के बेटे ने एक साथ सब कुछ पाने की चाहत में अपनी जान गवां दी। इसे ही कहते हैं—लालच बुरी बला है।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1: लोककथा (Folk Tale) किसे कहते हैं?
Ans: लोककथाएं वे कहानियां होती हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से सुनाई जाती हैं और जिनमें स्थानीय संस्कृति और नैतिक शिक्षा छिपी होती है।

Q2: इस कहानी का मुख्य सन्देश क्या है?
Ans: इस कहानी का मुख्य सन्देश यह है कि लालच करने से बना-बनाया काम बिगड़ जाता है और विश्वास एक बार टूट जाए तो दोबारा नहीं जुड़ता।

दोस्तों, आपको यह Hindi Folk Tale कैसी लगी? क्या आपके पास भी ऐसी कोई पुरानी कहानी है जो आपकी दादी-नानी ने सुनाई हो? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ Share करें!

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