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भूतिया हॉस्पिटल: एक सच्ची डरावनी कहानी

Posted on September 15, 2025 by My Hindi Stories

A journalist encounters ghostly spirits of a nurse and doctor inside an abandoned civil hospital ICU at night, surrounded by cracked walls, eerie smoke, and supernatural fire, in a cinematic horror scene.

भूतिया हॉस्पिटल की कहानियाँ सुनी-सुनाई थी, लेकिन मैं, आरव, एक पत्रकार, कभी सोच भी नहीं सकता था कि मैं खुद उस रहस्य का हिस्सा बनूँगा।

सब कुछ तब शुरू हुआ जब मैं इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहा था। मेरी नजर एक वायरल वीडियो पर पड़ी। वीडियो में कोई शख्स शिवपुर के बंद पड़े सिविल हॉस्पिटल के पास से गुजर रहा था। पीछे से आती थीं अजीब आवाज़ें — चीखें, दर्द और अनकही पीड़ा। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा, और जिज्ञासा ने मुझे रोक नहीं पाया।

मैंने अपने दोस्त और कैमरामैन विशाल को साथ लिया। रात 12 बजे हम हॉस्पिटल पहुँचे। बाहर की हवा ठंडी और भारी थी। दरवाज़ों पर जंग, टूटी खिड़कियाँ, और हर कोने से बदबू आ रही थी। सबसे डरावना था सन्नाटा — ऐसा सन्नाटा जो चीखों से कहीं ज्यादा भय पैदा करता था।

हॉस्पिटल का पहला सामना

हमने टॉर्च जलाकर धीरे-धीरे हर कमरे की पड़ताल शुरू की। दीवारों में पुराने दर्द की गंध थी, जैसे हर कोने में अतीत की चीखें फंसी हों। टाइल्स की खटखटती आवाज़ हमारे कदमों के साथ गूँज रही थी।

ICU की ओर बढ़ते ही हवा ठंडी और गहरी हो गई। टॉर्च की रोशनी में धुआँ घूम रहा था। अचानक ICU का दरवाज़ा चरमरा कर खुला। हम एक-दूसरे को देखा और अंदर कदम बढ़ाए।

ICU में आत्माओं का सामना

अंधेरे में एक सफेद परछाई उभरी — एक नर्स। उसका यूनिफॉर्म खून से सना हुआ था। वह धीरे-धीरे स्ट्रेचर धकेल रही थी। उसकी आँखें लाल अंगारों जैसी जल रही थीं। अचानक उसने पलट कर हमें देखा और बस एक चीख निकली:

“मुझे… बचा लो…”

हवा में धुआँ घुलने लगा। दीवारें धधक उठीं। हम फँस गए थे। तभी सामने प्रकट हुए एक बुज़ुर्ग डॉक्टर — एक आत्मा। उनकी आँखों में गुस्सा नहीं, थकान और गहराई थी।

“यहाँ क्यों आए हो?” उन्होंने पूछा।

“सच्चाई जानने…” मैंने काँपते हुए जवाब दिया।

“हमें मरने से नहीं, भुला दिए जाने से डर लगता है। उस रात हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने ताले लगवा दिए थे। आग में घिरे हम… बाहर नहीं निकल सके। अब हर रात हम वही पीड़ा फिर से जीते हैं।”

आग, आत्माएँ और अधूरी कहानियाँ

मैंने उनकी ओर देखा। पहली बार किसी आत्मा के लिए मेरा दिल भारी हुआ।

“मैं क्या कर सकता हूँ?” मैंने पूछा।

“हमारी कहानी दुनिया तक पहुँचा दो… शायद तब हमें मुक्ति मिल जाए।”

जैसे ही यह शब्द खत्म हुए, सब शांत हो गया। दरवाज़ा खुल गया। हम दौड़ते हुए बाहर निकले। गेट पार करते ही हॉस्पिटल एक तेज़ सफेद रोशनी में चमक उठा… और फिर अंधेरे में खो गया।

पत्रकार का वादा और मोक्ष

उस रात की रिकॉर्डिंग से मैंने डाक्यूमेंट्री बनाई – “शिवपुर की आख़िरी पुकार”। वीडियो वायरल हुआ। लोग वहाँ की पीड़ा और आत्माओं की कहानी महसूस कर पाए। अब वहाँ एक स्मृति स्थल है। हर साल मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं, और प्रार्थना होती है उन आत्माओं की शांति के लिए।

जब भी मैं उस तरफ से गुजरता हूँ… हवा में कोई कहता है:

“शुक्रिया…”

”कुछ कहानियाँ डराने के लिए नहीं होतीं… बल्कि उन रूहों की आवाज़ होती हैं, जिन्हें कभी सुना नहीं गया।”

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