भाई नाम है मेरा अंकित। मेरा दोस्त था रोहित – क्लास 5 से साथ, एक ही गली, एक ही स्कूल, एक ही कोचिंग। लोग बोलते थे हम जुड़वाँ भाई जैसे हैं। जब मेरी शादी हुई तो रोहित ने ही पूरा इंतज़ाम किया था। मेरी बीवी सोनिया को भी रोहित “भाभी” बोलता था।
फिर 2023 में मुझे 3 महीने के लिए साइट पर जाना पड़ा – राजस्थान। घर पर सोनिया अकेली थी। रोहित रोज़ आता-जाता था “भाभी का ख्याल रखने”।
एक दिन मैं सरप्राइज़ देने घर आया। रात 1 बजे। चाबी से दरवाज़ा खोला तो बेडरूम से आवाज़ें आ रही थीं। मैंने दरवाज़ा धीरे से खोला… रोहित और सोनिया… मैं वहीं खड़ा का खड़ा रह गया।
रोहित ने मुझे देखा तो हँसा – “यार सॉरी, हो गया। तू समझदार है ना?” सोनिया चादर ओढ़ के रोने लगी। मैं कुछ बोल नहीं पाया। बस बाहर निकल गया।
रात भर गाँव की सड़क पर घूमता रहा। सुबह रोहित का फोन आया – “यार गुस्सा मत होना, मैं शादी कर लूँगा भाभी से। तू नई ढूंढ ले।” मैंने फोन काट दिया।
फिर शाम को रोहित फिर घर आया। मैंने उसे बुलाया अंदर। चाय में नींद की गोली डाली। जब वो बेहोश हुआ तो मैंने गुस्से में उसका गला दबा दिया। सोनिया चीखी, लेकिन मैंने उसे भी थप्पड़ मार के चुप कराया। रोहित की लाश को पुराने कुएँ में फेंक दिया। पुलिस आई, केस बना “लापता”।
सोनिया डर के मारे चुप रही। हम फिर से साथ रहने लगे। बाहर से सब नॉर्मल।
फिर शुरू हुआ असली खेल।
पहली रात – मैं सो रहा था। अचानक बेड धँसा। जैसे कोई मेरे बगल में लेट गया। ठंडी साँसें मेरे गले पर लगीं। कान में फुसफुसाहट – “यार… सॉरी ना… अब तो साथ सोने दे…”
मैं उठ के बैठा – कोई नहीं था। सोनिया सो रही थी।
दूसरी रात फिर वही। तीसरी रात तो हद हो गई – बेड के नीचे से रोहित का हाथ निकला और मेरा पैर पकड़ लिया। मैं चीखा तो सोनिया उठी – “क्या हुआ?” मैंने कुछ नहीं बोला।
हर रात वही होता। कभी तकिए पर उसका सर का निशान, कभी बाथरूम में उसकी परफ्यूम की स्मेल। एक रात तो मैंने आँख खोली – रोहित मेरे बगल में लेटा मुस्कुरा रहा था। बोला – “यार अब तू अकेला नहीं सोएगा… मैं भी हूँ ना।”
मैं पागल हो गया। ओझा, मौलवी, पंडित – सबको बुलाया। सबने एक ही बात बोली – “जिसे मार के कुएँ में डाला है, वो छोड़ने वाला नहीं। अब या तो तू उसके साथ रहेगा… या वो तुझे ले जाएगा।”
फिर एक रात मैंने हिम्मत की। कुएँ पर गया। अंदर देखा तो रोहित की लाश नहीं थी। बस उसकी शर्ट तैर रही थी।
अगली रात मैं बेड पर लेटा था। रोहित फिर आया। इस बार उसने मेरे कान में बोला – “यार सोनिया अब सिर्फ मेरी है… तू बाहर सो जा।”
मैंने देखा – सोनिया मुस्कुरा रही थी। उसकी आँखें सफेद हो चुकी थीं।
सुबह मैं घर से भाग आया। अब दिल्ली में किराए के कमरे में रहता हूँ। लेकिन हर रात… बेड धँसता है। ठंडी साँसें लगती हैं। और कान में वही आवाज़ – “यार… भाग मत… दोस्ती निभानी है ना…”
कभी किसी ने तुम्हारे साथ धोखा किया हो… और तुमने बदला लिया हो… तो याद रखना। कभी-कभी बदला लेने वाला भी वापस आता है। और फिर छोड़ता नहीं।
कमेंट में सिर्फ “रोहित” लिखो अगर तुमने पूरा पढ़ लिया। और ये कहानी उस दोस्त को भेजो जिसके साथ तुम सबसे ज्यादा यारी करते हो। फिर देखना वो रात को फोन करेगा या नहीं।


