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10वीं फेल लड़का आज 22 साल की उम्र में 100 करोड़ की कंपनी का मालिक है – उसका नाम है…

Posted on April 10, 2026 by My Hindi Stories

उसका नाम है रुद्रांश शर्मा। आज आप उसे “Rudra Foods” के नाम से जानते हो – वही जो 2025 में 100 करोड़ टर्नओवर पार कर चुका है। लेकिन 7 साल पहले…

रुद्रांश 10वीं में फेल हो गया। मैथ्स में 12 नंबर, इंग्लिश में 19। टोटल 33%। पापा के पास कानपुर में छोटी-सी जूते की दुकान थी। उन्होंने गुस्से में थप्पड़ मारा और बोले – “अब दुकान पर बैठ। पढ़ाई तेरे बस की नहीं।”

रुद्रांश सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक दुकान पर बैठता। ग्राहक आते, मोल-भाव करते, चले जाते। वो चुपचाप देखता। एक दिन उसने देखा – लोग अच्छे जूते खरीदने आते हैं, लेकिन गाँव के बच्चों के पास 200-300 रुपये वाले भी नहीं होते।

उसने पापा से 5000 रुपये माँगे। पापा ने मना कर दिया। फिर उसने दुकान का पुराना माल (जो कोई नहीं खरीदता था) 3000 रुपये में बेच दिया। उस पैसे से उसने लोकल फुटपाथ पर 100 रुपये वाले चप्पल बेचने शुरू किए। पहले दिन – 18 जोड़ी बिकीं। 800 रुपये प्रॉफिट।

पापा ने देखा तो डाँटा, लेकिन चुप रहे। रुद्रांश ने 1 महीने में 30,000 बचा लिए। फिर उसने अलीबाबा पर सर्च किया – ₹18 में चप्पल बनती है चीन में। उसने 50,000 का ऑर्डर प्लेस किया (उधार + बचत मिलाकर)। चप्पल आई – ₹20 कॉस्ट, ₹100 बेची। 3 महीने में उसने 3 लाख कमा लिए।

पापा हैरान। अब रुद्रांश ने दुकान छोड़ दी। कानपुर के बाहर एक छोटा सा गोदाम किराए पर लिया। 10 मजदूर रखे। अब वो खुद डिज़ाइन बनाता, चीन से माल मँगवाता, और उत्तर प्रदेश-बिहार के गाँव-गाँव में सप्लाई करने लगा।

2022 में उसकी कंपनी “Rudra Foods” नहीं… गलती से लिख दिया। उसकी कंपनी का नाम है “Rudra Footwear”। 2022 में टर्नओवर पहुँचा 8 करोड़। 2023 में 28 करोड़। 2024 में 72 करोड़। 2025 में अभी दिसंबर चल रहा है – 100 करोड़ पार।

आज उसके पास:

  • 3 फैक्ट्री (कानपुर, आगरा, लखनऊ)
  • 1200 कर्मचारी
  • 8 राज्यों में डिस्ट्रीब्यूशन
  • अपना ई-कॉमर्स ऐप “RudraMart”

लेकिन सबसे बड़ी बात – हर साल वो 10वीं फेल 100 बच्चों को चुनता है। उन्हें 6 महीने की ट्रेनिंग देता है। फिर जॉब देता है – 25,000 महीना सैलरी + बोनस। उसका कहना है – “मार्कशीट से जिंदगी नहीं चलती… हिम्मत से चलती है।”

पिछले महीने उसने अपने पापा को नई दुकान खोलकर दी। और बोला – “पापा, अब आप रिटायर हो जाओ। अब मैं चलाऊँगा।”

रुद्रांश से जब पूछा गया – “तुम्हें सबसे ज्यादा क्या मदद मिली?” उसने हँसते हुए कहा – “10वीं का रिजल्ट। जिस दिन मैं फेल हुआ, उसी दिन मैं पास हो गया था। क्योंकि उस दिन मैंने फैसला कर लिया था – अब दुनिया मुझे मार्कशीट से नहीं, बैंक बैलेंस से जानेगी।”

आज रुद्रांश 22 साल का है। लंबॉर्गिनी चलाता है। लेकिन हर सुबह 5 बजे उठता है। और हर रात अपने पहले गोदाम में जाकर 10 मिनट बैठता है। बोला – “यहीं से शुरू हुआ था सब।”

अगर तुम भी 10वीं-12वीं में फेल हो चुके हो, या कोई तुम्हें बेकार बोलता है, तो बस ये याद रखो – रुद्रांश ने साबित कर दिया – मार्कशीट फेल हो सकती है, इंसान नहीं होता।

कमेंट में सिर्फ “रुद्रांश” लिखो अगर तुम भी मानते हो कि फेलियर शुरुआत है। और इस कहानी को उस दोस्त को भेजो जो अभी हारा हुआ महसूस कर रहा है। आज कोई नई शुरुआत करेगा। 💪

शेयर कर दो… कोई न कोई आज रात सोचने लगेगा कि “मैं भी कर सकता हूँ”

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