Children’s Stories, Story

भोलू और जादुई पेंसिल

Posted on December 3, 2025 by My Hindi Stories

A young Indian boy named Bholu holding a glowing golden magical pencil, surrounded by villagers and children, with scenes of a repaired roof, a pond, and children reading books he created, ultra-realistic 3D digital painting, magical and inspiring atmosphere

भोलू एक गरीब लेकिन होशियार लड़का था। उसका घर छोटा था, कपड़े पुराने और खिलौने थे ही नहीं। फिर भी, भोलू का दिल बड़ा था और उसका दिमाग कल्पनाओं से भरा।

हर दिन स्कूल से लौटकर वह मिट्टी में चित्र बनाता, पेड़ के नीचे बैठकर बादलों की आकृतियाँ देखता और सपनों की दुनिया में खो जाता। उसके सपनों में गाँव खुशहाल और हर किसी का चेहरा मुस्कुराता था।

जादुई पेंसिल का रहस्य

एक दिन, स्कूल से लौटते समय भोलू ने रास्ते में एक पुराना डिब्बा देखा।
जिज्ञासु भोलू ने डिब्बा खोला और उसकी आँखों में चमक आ गई।

डिब्बे के अंदर एक सुनहरी पेंसिल थी, जिस पर लिखा था:
“जो भी इस पेंसिल से बनेगा, वह सच हो जाएगा। लेकिन केवल भलाई के लिए इसका इस्तेमाल करना।”

भोलू की आँखें खुशी से चमक उठीं।

पहला जादुई चमत्कार

उस रात, माँ ने चूल्हे की खाली हांड़ी देखी और धीमे से कहा,
“आज शायद हमें भूखा ही सोना पड़ेगा।”

भोलू चुपचाप अपनी स्लेट और पेंसिल लेकर अंदर गया। उसने एक कटोरी बनाई और उसमें गरम-गरम चावल और सब्ज़ियों का चित्र खींचा।
कुछ ही पल में चित्र असली बन गया। माँ की आँखों में आँसू थे।
“तू तो मेरा जादूगर है!” उन्होंने कहा।

भोलू ने महसूस किया कि अब उसके पास केवल शक्ति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है।

गाँव के लिए भलाई

भोलू ने ठान लिया—“अगर मेरे पास यह शक्ति है, तो मैं दूसरों की मदद करूँगा।”

  • जब गाँव की बूढ़ी अम्मा की छत टपक रही थी, भोलू ने उसकी छत ठीक कर दी।
  • जब बच्चों के पास किताबें और स्लेट नहीं थीं, भोलू ने उन्हें बना दी।
  • जब गाँव की गायें पानी के लिए तरस रही थीं, भोलू ने एक बड़ा तालाब बना दिया।

धीरे-धीरे पूरा गाँव बदल गया। लोग खुश रहने लगे। सभी ने भोलू को प्यार से “छोटा देवता” कहना शुरू कर दिया।

लालच का प्रलोभन

एक दिन शहर से शंकरलाल नाम का एक लालची आदमी गाँव में आया। उसने भोलू की पेंसिल के बारे में सुना।

“मुझे वह पेंसिल दे दो। मैं तुम्हें बहुत सारा पैसा दूँगा,” उसने कहा।

भोलू ने सिर हिलाया, “नहीं साहब, यह पेंसिल केवल भलाई के लिए है।”

गुस्से में शंकरलाल ने पेंसिल चुरा ली।

लालच की सजा

शंकरलाल ने बंगलों, कारों और सोने के पहाड़ बना लिए। लेकिन जब उसने पेंसिल से “सोने का इंसान” बनाने की कोशिश की, पेंसिल चमकी और बोली:
“लालच के लिए बनाई गई चीज़ें टिकती नहीं।”

सारी चीज़ें हवा में उड़ गईं और शंकरलाल बेहोश हो गया।

भोलू ने पेंसिल वापस ली और शांति से कहा,
“सच्ची खुशी लेने में नहीं, देने में है।”

आखिरी चित्र

कई साल बाद, भोलू ने एक आखिरी चित्र बनाया—एक सुंदर स्कूल, जहाँ हर बच्चा पढ़ सके।
उसने पेंसिल को धन्यवाद कहा और उसे एक छोटी सी डिब्बी में रख दिया। नोट के साथ लिखा:
“अगर यह पेंसिल किसी अच्छे दिल वाले को मिले, तो इसका उपयोग केवल भलाई के लिए करना।”

कहानी से सीख

सच्ची ताकत उस इंसान में होती है, जो अपनी शक्ति का इस्तेमाल दूसरों की भलाई के लिए करता है।
लालच से नहीं, प्रेम और सेवा से ही दुनिया बदली जा सकती है।

अब सोचिए—अगर आपके पास जादुई पेंसिल होती, आप सबसे पहले क्या बनाते?

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