राजा और तोते की कहानी हमें सिखाती है कि सच्चाई चाहे किसी छोटे से मिले, उसे अपनाना ही बुद्धिमानी है।
राजा वीरेंद्र: ऐश्वर्य में उलझा जीवन
राजा वीरेंद्र के पास सब कुछ था—भव्य महल, विशाल सेना, अपार धन, और दरबारियों की सराहना।
लेकिन हर रात, वह अकेले अपने सिंहासन पर बैठा सोचता—“क्या यही जीवन का असली सुख है?”
एक दिन, उसे एक अनोखा पालतू तोता उपहार में मिला। हरा रंग, चमकती आँखें, और एक शांत लेकिन गहरी समझ। राजा ने उसका नाम रखा—सत्यवान।
तोता सत्यवान और उसका ‘कड़वा सच’
शुरुआत में तोता सिर्फ राजा की बातें दोहराता। लेकिन धीरे-धीरे उसके शब्दों में गहराई और सच्चाई आने लगी।
एक दिन राजा उदास बैठा था।
तोते ने पूछा:
“राजन, क्यों उदास हो?”
राजा बोला:
“सब कुछ है, मगर मन भरा नहीं।”
तोता बोला:
“जिसका मन भरा नहीं, उसका महल भी खाली है।”
राजा चौंका। पहली बार किसी ने उसे आईना दिखाया।
रोज़ की सीख: छोटे सवाल, बड़े बदलाव
सत्यवान रोज़ छोटे सवाल पूछता:
- “राजन, जब तुम हँसते हो, क्या प्रजा भी मुस्कराती है?”
- “तुमने कभी बिना पुरस्कार किसी की मदद की है?”
- “क्या किसी ने आखिरी बार बिना डर के तुमसे सच कहा था?”
ये सवाल राजा के मन में गहरी सोच की लहरें खींचने लगे।
एक दिन राजा ने दरबारियों से पूछा:
“क्या मैं अच्छा राजा हूँ?”
सबने कहा: “हाँ, राजन। आप महान हैं।”
तोता बोला:
“जो सिर्फ प्रशंसा सुनता है, वो सच्चाई से दूर हो जाता है।”
बदलाव की शुरुआत: राजा बनता है सेवक
राजा ने अपनी दृष्टि बदल दी। अब वह:
- प्रजा से रोज़ मिलने लगा
- उनके दुःख-दर्द सुनने लगा
- किसानों, सैनिकों, और व्यापारियों से सीधे बात करने लगा
- न्याय में पक्षपात छोड़ दिया
धीरे-धीरे राज्य में खुशहाली और शांति लौट आई। राजा अब सिर्फ सत्ता का मालिक नहीं, जनता का सच्चा सेवक बन गया।
अंतिम सबक: जीवन की असली सीख
एक दिन तोता बीमार हो गया। राजा ने उसकी सेवा पूरी लगन से की।
तोते ने मुस्कुराते हुए कहा:
“राजन, अब तुमने राज करना नहीं, जीना सीख लिया है। जब तुमने दूसरों के दुःख समझे, तभी तुम्हारा हृदय पूर्ण हुआ।”
कुछ दिनों बाद सत्यवान उड़ गया—या कहें, इस दुनिया को छोड़ गया।
सीख/Moral
सच्चाई चाहे कहीं से मिले, उसे अपनाना ही बुद्धिमानी है।
अगर आप राजा होते, तो सबसे पहले क्या बदलते?
क्या आपने कभी किसी छोटे इंसान/जानवर से जीवन की बड़ी सीख ली है?


