परियों की दुनिया में यात्रा कहानी हमें सिखाती है कि खुशी, धैर्य और दूसरों की मदद करने में असली जादू छुपा है।
गाँव के एक छोटे-से घर में एक बेहद प्यारी, जिज्ञासु लड़की रहती थी—निहारिका। उसकी आँखों में हमेशा चमक रहती, जैसे वो किसी अदृश्य दुनिया से बातें कर रही हो। और क्यों न हो—उसे किताबों से इतना प्यार जो था! किताबों के बीच वह खुद को हर रोज़ एक नई दुनिया में पाती।
एक दिन, किताबों को समेटते हुए उसकी नज़र एक पुरानी, धूल-भरी किताब पर पड़ी। बाकी किताबों से बिल्कुल अलग—न जाने कहाँ से आई थी। जैसे ही उसने किताब खोली, उसमें से हल्की-सी सुनहरी रोशनी निकली। निहारिका चौंकी, पर उसका डर जिज्ञासा के आगे हार गया। जैसे ही उसने पढ़ना शुरू किया, किताब के पन्नों के बीच एक जादुई दरवाज़ा खुला… और उससे आती चमक ने निहारिका को अपनी बाँहों में खींच लिया।
परियों की दुनिया में पहला कदम
पलक झपकते ही निहारिका एक नई, अनोखी दुनिया में थी। आसमान साफ़ नीला था, हवा में फूलों की मीठी खुशबू थी, और रंग-बिरंगे पक्षी आस-पास उड़ रहे थे। पेड़ों पर छोटी-छोटी परियाँ हँस रही थीं, चमक रही थीं—जैसे पूरी दुनिया ही मुस्कुरा रही हो।
तभी एक प्यारी सी परी उसके पास आई।
“नमस्ते! मैं लैला हूँ,” उसने मुस्कराते हुए कहा, “परियों की दुनिया में तुम्हारा स्वागत है। तुम यहाँ कुछ ज़रूरी बातें सीखने आई हो।”
निहारिका ने हैरानी से पूछा,
“क्या सच में? क्या मैं परियों से कुछ सीख सकती हूँ?”
लैला हँस दी, “बिलकुल सीख सकती हो। हमारी दुनिया में हर चीज़ तुम्हें कुछ सिखाने आई है।”
खुशी की पहली सीख
लैला उसे एक नन्ही परी रिमा के पास ले गई। रिमा हमेशा मुस्कुराती रहती थी। उसने कहा,
“हम परियाँ कोशिश करती हैं कि हम हमेशा खुश रहें। क्योंकि जब हम खुश होते हैं, तो हमारी खुशी आस-पास फैलती है, और दुनिया और भी सुंदर बन जाती है।”
निहारिका ने पहली बार समझा कि सिर्फ अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए भी खुश रहना कितना ज़रूरी है।
धैर्य और हिम्मत की सीख
फिर वह माया नाम की एक बुज़ुर्ग परी से मिली। उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन उसमें गहराई थी।
माया ने कहा,
“जीवन में मुश्किलें तो आएँगी बेटी… लेकिन जो उन्हें धैर्य और साहस के साथ पार कर ले, वही असली विजेता होता है। कभी हार मत मानना।”
ये शब्द निहारिका के दिल में गहराई तक उतर गए। उसने महसूस किया कि कठिनाइयाँ हमें गिराने नहीं, बल्कि मजबूत बनाने आती हैं।
परियों का सबसे बड़ा राज़
अंत में, निहारिका सिया से मिली—जो वहाँ की सबसे समझदार, सबसे शक्तिशाली परी थी।
सिया ने कहा,
“दुनिया में हर इंसान अपनी परेशानियों से लड़ रहा है। लेकिन असली जादू तब होता है, जब हम एक-दूसरे की मदद करते हैं। जब हम अपनी अच्छाई फैलाते हैं।”
निहारिका ने वादा किया कि वह वापस जाकर यही करेगी—अच्छाई फैलाएगी, लोगों की मदद करेगी, और अपने दिल की बात सुनेगी।
घर वापसी और एक नया निहारिका
निहारिका अब पहले जैसी नहीं रही। उसके भीतर एक नई गर्माहट, नई समझ, और नई रोशनी जन्म ले चुकी थी।
“मैं यह सारी सीख अपने जीवन में ज़रूर अपनाऊँगी,” उसने सिया से वादा किया।
सिया ने उसे गले लगाया। “हमेशा अपने दिल की सुनना—वही तुम्हें सही रास्ता दिखाएगा।”
जादुई दरवाज़ा दोबारा खुला… और निहारिका अपने कमरे में लौट आई—लेकिन एक बदल चुकी निहारिका।
अब वह पहले से ज़्यादा खुश, धैर्यवान, और दयालु थी। उसने जाना कि—
खुशी फैलाने में असली जादू है।
मदद करने में असली ताकत है।
और दिल की अच्छाई में असली सुंदरता है।
वह हर दिन नए उत्साह के साथ जीने लगी, दूसरों के लिए मुस्कान बनकर।
सीख/Moral
“जादू हमारे अंदर ही होता है—हमारी सोच में, हमारी मुस्कान में, और हमारे दिल की अच्छाई में।”
अगर हम प्रेम और सकारात्मकता से जीएँ, तो हमारी दुनिया खुद-ब-खुद जादुई बन जाती है।
अगर आपको निहारिका की यह जादुई यात्रा पसंद आई हो,
तो आज ही किसी एक छोटी-सी अच्छाई का काम करके देखिए—शायद आपको भी अपना जादू मिल जाए।


